प्यारी रस प्यासे को पियावत पानी
प्यारी रस प्यासे कौ प्यावत पानी।
जतन अनेकौ करत छुपावे,नाहि दैवे करवै मोहे मन-मानी।
सैनन करिकै प्यास बढावै,जावू पीवै तऊ लए नैन चुरानी।
प्यादै प्यारी नेक ढुरिकै,भया मेई याचक भई तू दानी।
बतिया करत सरस रसीली,"प्यारी" जोरि इनकौ दूजा ना सानी।
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