देखि लचक

देखि लचक अंगनि लली वारे।सरबस अपनपौ पिय परै हारे।

भई शिथिल पिय अंगनि शोभा।बाढा मोद हिय अति लोभा।

चहै पकर उर प्यारी लगाऊ।पगौ प्यारी रस सिंधु जाऊ।

बात पिय मनकी जब जानी।प्यारी निकट पिय कै आनि।

रहै पकरि लए कंठ लगाए।बहु विध सौ पिय प्यार लुटाए।

"प्यारी" विनती करै तृण तोरि।रहो सदा ऐहि भाँति जोरि।

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