अतिहि सरल सुभाव सलोने
अतिही सरल सुभाऊ सलौने।
मंद हाँसि सुख सरल राशि,ज्यू दोउन अबही लौ छौने।
अति मृदुताई की यौ अधिकाई,जनौ नवनीत के ही है लौने।
यौ नैननि नेह भरि बरसत मेह,शावक हरिण ज्यू होए शौने।
अरि निरखि हसै नवे खेल रचै,यौ होए आपस प्रेम खिलौने।
बातन ऐसी करी प्रियजन जैसी,सर्व अति अपनै अति-सै अति गौने।
जै युगल छबी अति "प्यारी" फबी,चहै परि रहै कुंजनि किसी कौने।
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