ब्रज चंदन चंदन अंग

ब्रजचंदन चंदन अंग लिपटै।
बडभागी मलयज अज गातन,लाड लडावत नेह तै चिपटै।
कनक लली मनौ पिय सजावन,भीतर तै बाहिर आ छिटकै।
यातौ भरि भीतर लाली रस,अति बढिकै चंदन सम दीखतै।
भांति "प्यारी"पिय केली के ही,जानत रूप अनेकौ एक-जे।

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