देखि अधर खिली मुसकानि

देखि अधर खिली मुस्कानि।
भौर अतिही बेला मधु पावन,उर छबी छबिलै दिखानी।
पुलक रोमहु प्रति अंग भारी,मरी मौमे प्राण-लगै आनि।
कही सुनि होई जोई बिसारी,खोई रसहु अधर रसखानि।
कहै "प्यारी" योई भरेहु रहियौ,येई अरज दोउ चरणानि।

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