मोह सौं पूछत रे मनवा
मौ सौ पूछत री मनवा,मौह च्यौ निर्मोही सौ करा।
भर लियौ दृग काहै नीर पीर-तै,लियौ हिय बिरहानल च्यौ जरा।
आप बोय लियौ उर काहै कंटक , काढू बोउ दोनोई घाम परा।
अखिन दोष करि भोग भौगे जिवरौ,उल्टौ काहै विधना न्याय करा।
बिबश तऊ "प्यारी" बोल ऐसै बोले,सुनि प्यारौ प्राणन प्यारौ जरा।
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