रस प्यास देखि सागर की
रस प्यास देखि सागर की।
सबसोई बडी सबसौ निराली,अचरज भरी प्यास नागर की।
डूबे सदाई सदाई रस प्यासे,भाँति कोउ रीती गागर की।
नवी रीति प्यास नवई,अबुझी ज्यौ प्यास टाबर की।
पीवै बरसे पुनिही पीवै,प्यासे भाँति कारे बादर की।
"प्यारी" प्यासी प्यास इसीकी,प्यास प्यासी गौर साँवर की।
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