शयन भाव
शयन भाव
बरस पञ्च छः लाला सोबत देख्यौ।
कर दुई उपर बंधिहै मुठिका,झोरै बंशी राख्यौ।
पग उपरि पग चढि होहि,काछनी पीत सोह्यौ।
झबुला झौरा अंग उपरि पहिरै,करधनी प्यारी बंध्यौ।
नैन शांत शीतल बंद होहै,अधर मुस्कात रह्यौ।
अलक कछु कपोल ढुरि अयी,ज्यौ नगीन तमाल चढ्यौ।
दरस पावत प्यारी सुभाग बढिहै,नित ही दरस दैख्यौ।
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