रूप अनूप
रूप अनूप
रूप अनूप सह्यौ नाय जावै।
प्यारी प्यारौ नेह बरसावै।
अंग अंग टोना साँवरा सलौना,नैनन मग हिय धसी जावै।
प्रीत को रीत निभावौ तुमही,तुमसो हम रीत सीख जावै।
हसत जबहि हमकू निरखौ,बंकी छबी हम मरि जावै।
रमणा प्यारी अबही वरियौ,बिनु थारौ पलहु रह्यौ न जावै।
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