म्हारी अखियन प्यास न जाये

म्हारी अखियन प्यास ना जाए।
बरसत निसदिन भरी सागर सी,नाय रीतै तऊ ओरहु चाहे।
आवै याद बरसै तबहु भी,आवै पिय तबहु-ना रूक पाए।
बरस-बरस बनी जमुना खारी,मौहे दीन्ही पी नदी बनाए।
तऊ देखन बरसन हित रमणा,"प्यारी" रोम रोम नैन चाहे।

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