दिन शुभ कुंजन गुंजन

दिन शुभ कुंजन गुंजन भारी।
लता कुसुम बने द्वार अटारी,टेढे राजै जामै रमण बिहारी।
अंगनि सुरमा नैन परै कौरे,हित मारन ज्यौ चाँदी-हु कटारी।
दिवस जनम उत्सव भयौ आजु,फूली फिरै उर सखिन फुलवारी।
बधाई बधाई मचौ कोलाहल,मिला स्वर इनमेई गावै "प्यारी"।

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