रोवू छुप छुप

रोवू छुप छुप रमण बिना री।
मन की सुनन वारौ दीखै ना कोउ,कहू का सौ बिरह पीरा री।
उरतै लगा कोउ धीर धरावै ना,रौवू परी भूमि पै धूरि सी।
मौरे बहतै असुवन कोउ ना पौछे,जावै झर झर सूखे आपौ री।
कहै "प्यारी" कोउ प्रीत ना करियौ,परै पल पल अगन जरयौ री।

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