ऐसौ अडै नैनन रमणा,देखन दैवे कछु नाही।

ऐसौ अडै नैनन रमणा,देखन दैवे कछु नाही।
जग पाछै पिय अडिहै आगै,जैसो पट खिरकी परिहा;बसन झीनौ प्रेम का-ही।
सुनै नाही श्रृवणा आछिहु काची,कहवौ जग कछुही बकना;भाँति सुनै भीत सोई।
चाहवू हाँसू रौवू आपई इकली,चहै संगै जग रखना;यासौ फिरु बचतोई।
बात सुनो "प्यारी" एकई ऐजी,नैनो ऐसे गाढै बसना;दीखै जग जरा नाही।

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