नित नव खेल करे दोउ।

नित नव खेल करे दोउ।
बंद मुठिका कुसुम इक धरै,दैखे बूझे ठीक बतावै कोउ।
पहिलौ दाँव पिय लए खेले,प्यारी चूनर चँद्रिका दाँव धरी।
बूझी ना बात सही हारी,पट पीत पगा बदल परी।
पुनि पिय दाँव लए प्यारै,नक बेसर प्यारी दाँव दई।
कह दए कर दाँव जीत लई,अबके पिय प्यारी दाँव लई।
हारै पिय दाँव बेसर संग,नथ बेसर संग पिय पहराई।
पुनि खेले पुनि दाँव धरै,करे पुनि भूषण बसन बदलाई।
पिय प्यारी प्यारी पिय भई,छबी बाँवरी "प्यारी" कर आई।

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