गठजोड़
गठजोड
करे गठजोड युगल को सखिया।
ललिता विशाखा सखी ओरि ओरि,बांधत कर दई गठ जोरि।
चुनर नील पटा पीत बंधाया,बैठायी पुष्पन हिंडौला भोरी।
बसन भूषण दुई ऐकेहु सजाहै,ऐकहु पहराई बनमाला डोरी।
हल्दी कुमकुंम चरण सजाए,भाल सैंदुर कौ बैंदी रचौ री।
नीको नीको झुलावै सखियन,हसत कस पकरत श्याम किशोरी।
झौटा ऐक दुई कदसी देवू,पूछै प्यारी देखू कदै रूप ठगौरी।
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