बंधन काटिहो
बंधन काटिहौ
बंधन काटिहौ तारनहार।
जग भयै कारागार सम ही,छुडहिहो अबहु आय।
बैडि नेह झूठी जग कौ काटिहै,बांधिहो आपनौ जाय।
भरमत जगहु दिन बड्यौ बीतै,काटै बैडि कटे ना हाय।
नेह कौ डौरी बांध लयौ मौहै,जग नाहि नेक सो भाय।
दरस दो प्यारी बिरहन कौ जी,दरस दिखावौ आय।
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