रथ सुनि हिय काम्प गयो री

रथ सुनि हिय काँप गयौ री।
रथ ऐहि भातिँ अक्रूर लायौ ,गयौ पिय प्यारौ संग लयौ री।
रथ ऐहि भाति पिय बैठ कहै,आवू परसौ सांझ ढरयौ ही।
रथ ऐहि देखि निर्भाग करी,ह्यौ कौ जिवतौ जी मार दुरयौ री।
रथ ऐसोई एक उधौ आए,अरी ज्ञान गूदडी लाद चल्यौ री।
रथ बहौत करी हम गौपिन सौ,"प्यारी" याए कू आग लग्यौ री।

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