कृष्ण चकोर
कृष्ण चकोर
सखी जु भये हम कृष्ण चकोर।
भौर ही जागती दौरी जावती,मुख निरखन नंद ठौर।
दही बिलौवती माखन निकारती,ले धरती छिपा कही ओर।
आवन देखती राह निहारती,छुप आवत जबै नंद किसोर।
दूरि छिपाती जोई वौ ढूंढतौ,उतनोई देरि तकत मुख भोर।
आय सुनो बिनती म्हारौ गिरधर,दासी ना दीज्यौ कोउ और ठौर
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