आगत सुनि

आगत सुनि श्रावन री लली लालन संग झूलावौ।
आम्र कुंज गहन अति छैय्या,गूथ सुमनि डोरी डारो,पट शीतल चंदन डारो री जोरी नित्य नवी बिठावौ।
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कोकिल मोर बैठि गए कोहर,सुर मधुर धुनि गावौ,राग प्रेम मल्हार गावौ री वाद्य भाति सरस बजावौ।
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जूथ दोउ अलिन सब पाटौ,भौह नैननि सैन चलाति,प्रति अंग सुअंग मिलवौ री करि जतन बाँह गहावौ।
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झौटा देओ भाति इस दौला,बद्ध गाढ आलिंगन बंधावौ,भीति उर आनन धरावौ री सुख लालन अतिहि पावौ।
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अधरन छाप वक्ष पिय छापित,देखि भोरी लली लजाई,झुकी पुन: बरौनि उठावौ री पिय मन्मथ चौप जगावौ।
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धावति तजि निभृत दौला गई,पश्च प्रीतम कामुक धाए,"प्यारी" दौनो बाँह उठावौ री जोरि अला बला दुरावौ।

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