हती मोर पखा

हती मोर पखा
हती जो सखी मोर पखा हमहु।
लगी केश लालजु को इठलाती,झूमत पवन कौ संगहि जाती।
कबहु लेवत कर राधिका किशोरी,फँसत करहु अंगुरी फँस जाती।
लै बैठाय अति लाड सौ लडैती,मोर पखा धर केश लगाती।
मुदित होय नैन अश्रु बहावत,लाल कमल पद शीश नवाती।
सौरभ कुमकुम अंग लपटावत,सुभाग अनोखा पखा अज पाती।
कदसी होय प्यारी ऐसो भाग,श्यामसुन्दर मोर पखा ह्यै जाती।

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