किशोरी चरण कमल रज
किशोरी चरण कमल रज कीजौ।
पग धरै चलिहै जित्तहु धरणी,तित्हु बिछाय मोय प्यारी लिजौ।
बिन पाहुन डोलत जई इत्त-उत्त,काकरहु उर मोय लेन दीजौ।
हित पोछन करिहै ह्यौ बसना,चरणरविंद जई जल सौ भीजौ।
सम मकरंद कोमल करि "प्यारी",प्यारी जु चरण तली बसा लिजौ।
Comments
Post a Comment