जुगल तरु देख बढ़ा मनि लोभा
जुगल तरू देखि बढा मन लोभा।
मिलित योई ज्योई दोउ प्यारै,अंगनि मिले भुज मेलै रस जोडा।
दिपित रोम रस दीप्ती सोई,एकहु रोम अनगिन चंद शोभा।
खिलित कुसुम प्रीत बसना ऐसौ,जैसोई बरण पीत ओढे कोउ सौता।
"प्यारी" देखि नाय भरिकै नैनन,इतनोई छबी गई उर हटी औझल।
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