चहावे मना
च्हावै मना
च्हावै मना उडनौ ही ब्रजधाम।
जमुना शीतल कुंजन सुंदर,नाचत मयूरा रंग रंगीलै।
निजही महल अटा अटारी,सरस सुंदर लली लाल सजीलै।
नित नितही नव उत्सव,नित ही रस नव नव नवीले।
युगल जौरी नित नव माधुरी,टहल महल नित रंग रंगिलै।
बसाय लैवो जा ही ब्रजधाम,जहाँ बसत प्यारी प्राण सजीलै।
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