सखी परत फुहारै भीजै

सखी! परत फुहारै भीजै राधारमण।
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भीजत धोती पटका अंगिया,भीजै नुपुर गल कर कौ भूषण।
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बूंदनि चमकत अंगनि योई,ज्योई चमकत तारे कारी रैन गगन।
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झरत बेसर चिबुक वारि,झरै कुसुमनि जई दए प्यारै हसन।
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थिरकत अंगनि सुनत फुहारै,"प्यारी" तारै बलाए छबी मन-हरण।

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