रमण बसै नैन

रमण बसै नैन कजरै कौ भाँति।
जब सौ बसै जग कजरा ना लायी,इन्हु बना लई रेख कजरा की।
कजरा लगै नैन शोभा बढै नैनन,भाग बाढै मौरे तो इनसौ सजाकै।
डरपू पलक ठाय निकरि ना जावै,जगहु फिरू मिरू नैनहु झुकाति।
समुझावै जग पाप करै सौ झुकावै,जानै नाहि पिय अरू मौर मन बाति।
कहै तो कहै जग "प्यारी" कहा करिहै,मेरौ कहा करै मै-तौ पिय रंग राँचि।

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