लगा मनवा जुगल चरण हित लाग

लगा मनवा जुगल चरण हित लाग।
ठौर ओर उर कबहु ना लाय,पायन इन धरि सर जान सुभाग।
किरपा इन्हीं इन लिजौ दुलराय,बनि वीणा गावौ इन सुख राग।
खोल नैननि जग बहौत ली सोयी,मूंद नैननि जग ओरि सौ जाग।
श्वास अबई इसी सोई भज "प्यारी",जानै कबहु टूटि जावै श्वासन ताग।

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