आज आर हो या पार हो
या आर हो या पार हो.........अब मंजूर ये दरकार हो.....
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जो है बेबाक कह ही दो,अब बात गोया साफ हो
किस्सा ये अब सरकार का.............या आर हो या पार हो.......
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बिन लफ्ज के कहते हो जो, बयां दीदार-ऐ-साथ हो
सहने की या तासीर हो…................या आर हो या पार हो.....
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अक्सर ख्यालो मे जो वो, अब हकीकत-ऐ-चश्म हो
या फिर ख्याल-ऐ-जहान के........या आर हो या पार हो.........
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सरोकार हो इकतरफा अब,तुमसे या झूठे झूठ से
रस्ता अब इक इख्तियार हो...........या आर हो या पार हो.......
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आखिरी तकल्लुफ बस ये हो,"प्यारी" दिल-ऐ-दिलशाद का
तुम हो जहा गुलजार हो.................या आर हो या पार हो......
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