दिन मास बरस रितु बदले
दिन,मास,बरस रितु बदलै,बदलै न भाग के लेखै।
वोई श्वास लैवन आवन जावन,वोई उदर भरण पौवन खावन,नित वोई वोई करनी भरनी,नाय कछुक नवौ आय देखै।
होई हूक कबहु मिलनी चलनी,होई विलग कबहु जग मे ढलनी,नित पुनि पुनि मरनी जरनी,मरि मरि जी जी पुनि रेखै।
"प्यारी" आस तबहु आनि सुनहु,आवन हित उन जानि धुनहु,नित सुपन नवै झरती चुनती,अरी नैननि रहै मौरे दुखै।
Comments
Post a Comment