सौतन बंशरी

सौतन बंशरी

सौतन बंशरी मेरी।
संग साथ चले,रहवै कटी ही फसी।
छूवे अधर जबै,हिय जरत अरी।
पौरी बाँस की सी,गुण कौन ले री।
जी करे प्यारी,कर लउ चोरी।
छिपा दूर दऊ,माँगे नाय देनी।
अरी सुन री सखी,ऐसो नाय करनी।
बंशी जान उनकी,हम नाय हरनी।
वह हिय उनकी,होय वा कौ तन सी।
प्यारी सोचै बैठी,कब होऊ बंशी।

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