मानै मन नाही कोउ कौ अपना।
मानै मन नाही कोउ कौ अपना।
रमण बिनु सब लागै पराये,लागै जग झूठौ रैन कौ सपना।
रसना नाम दूजौ लैन ना चाहै,चहै रमण रमण मन जपना।
देखन चहै उन सुननौ उनकोई,नाही उन सौ चहै नेक हटना।
तऊ बेबस "प्यारी" मारि मन जीवै,जीवै घुट घुटकै बिनु रमणा।
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