सुधि लीन्ही न म्हारी
सुधि लिन्ही ना म्हारी गिरधारी।
हमसौ बात कैसो कौन खिझाई,जोई बनो निर्मोही म्हारी बारी।
सुनि जौ पुकारै दौरे चले आवौ,नीति प्रेम काहै दीन्ही बिगारी।
हसिकै टारौ म्हारै ताने उलाहने,कबहु दशा लेओ जी म्हारी विचारी।
अबिकै भी जोई योई भेजियौ "प्यारी" ,जगत हौवे हाँसी जु बडी थारी।
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