भयो अद्भुत कुँज बसंत

भयौ अद्भुत कुंज बसंत।
झरोखे अटारी तोरण कुसुम सजै,रंग्यौ अरूणई पीत रंगन्त।
सरसौ पीतई बसन वपु धरै,गल मालई अरूण धरन्त।
अधरन मुस्कनि अनुपम देखि सबै,कणौ पुलकित कुंज हसन्त।
राग रागिनी साज वाद्य बजिहै,नाट निरतई चलिहै निरन्त।
नव-नव नितही जोरि रस लीला,"प्यारी" दरशन गावै अनंत।

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