मो सम अधम

मो सम अधम
मौ सम अधम न कोय।
दिवस खाय गमाय बितावू,रैन बिताय देऊ सोय।
बिसार दई नाम जुगल जोरि,मम सम अधम न कोय।
बिष बिषय बहुतैरे पचायै,नाम लेवन सुधि नाय होय।
अबहु जगी सोवन सौ उठिहै,करै बिनती जौरि कर दोय।
रह रह जगत पुनिहि सोवत,ऐसौ अधमन दासी कैसौ हौय।
कृपा करो दासी प्यारी जगावौ,दिना बीते भतेरे सोय।

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