एकहु दिन लली लला ते झगरी

एकहु दिना लली लाल तै झगरी।
तीखै बैन बोली मृदु वाणी सौ,बोलि करि सैनन लाल ओरि अंगुरि।
खोयी मुद्रिका करा-वली की अजहु,तबई खोयी जई अंगुरि तुम पकरि।
जानै हम तुम्हु लीन्ही है चुराई,दीजौ लौटाया सौह तुम्हु हौ हमरी।
है नीचै नीचै आरोप धरी झूठै,"प्यारी" हासै देखि लाल शोभा सजरी।

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