अरज सुनियो

अरज सुनियौ
अरज म्हारी सुनियो अजी गिरधारी।
नाय जानू रहनौ बिनु तिहारौ,राह देखत हौ तैरौ हि मुरारी।
सजीलौ सजौ दैख्यू टेढो लकुटी लौ,कदसी करो पूरी अरजा हमारी।
कमल नयन शत पत्र कमलौ,काजल रेख दैख्यू लगीही किनारी।
भव सागर नाव पुरानी डौल्यौ,बिनु तौहरै डूब ना जावै बिचारी।
आय प्यारी भाग लगावन आवौ,राह तकत बीत्यौ उमर ना सारी।

Comments

Popular posts from this blog

हरि आए संग

कहा प्राणन

तुव बिन पिया