रँग रस रास

रंग रस रास रसिकबर खेलै।
सुंदर सेज विटप तलै फागुन,मूंदे नैन बांह गल मेलै।
अंगनि मिलै अंगनि सब ऐसौ,जेसौ भानु तेज एक हेरै।
नवल कुसुम सम रूप ललीकौ,लाल नवल कोपल सम टेरै।
मधुर सौरभ रस अबीर स्वेदहु,"प्यारी" होरी अनूप यौ खेरै।

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