बैठी मानसरोवर

बैठी मानसरोवर मानहु ठानी।
बिनु सिंगारी बसन निशि वारै,देखि अतिही फैरी मुखहु म्लानि।
मानिनि मान धरी पिय रूठी,ठाडी करिही द्वारै सखिन सयानि।
मुख मौडे कर टैकत बैठी   ,  उर चौपहु मिलनौ तऊ-ना मानि।
द्वार ठाडै पिय जोडे करहु , कहै प्यारी प्यारी हा-हा खानि।
अबेर भई भौरतै रूठतई ,"प्यारी" करै-का हित लली मान छुडानि।

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