कारे बदरिया घिर घिर
कारे बदरिया घिरि-घिरि आए,दीजौ सुनाय कहा बात पी लाए।
बूंदिया असुवन भरि- भरि जानै,याए रस सरस पिय कौ बिखराए।
पियही तोय का उरतै लगाए,दए निज रंग तौपे कछु छिटकाय।
यातौ बैरी जिय मोर जलावन , झौरे पिय म्हारै तोय भिजवाय।
जोई होय वोई "प्यारी" कहियो,भाँति बदरा मोय लिजौ लौटाय।
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