मुहर मोपे दीजो लगा ऐसी

मुहर मौ पै दीजौ लगा ऐसी।
कहवू ना मुख सौ हूं गिरधर की,बिनु कहै जैसो सौरभ सुमन है जी।
नैन कोई देखे तो दीखै रंग साँवल,हौ सम्मुख कोई दूजा ना दीखै जी।
अंगनि बसै यौ सौरभ रस रमणा,जाकोई मिलै ढूंढै बस रमणा ही।
कहु कछु मुख सौ सुनै नाम पी कौ,खौ जावै "प्यारी" बचै दीखै सजना ही।

Comments

Popular posts from this blog

हरि आए संग

कहा प्राणन

तुव बिन पिया