रस को स्वाद
रस को स्वाद रस प्यासोई जानै।
जिन ना पिये उन हौवे नाय हौवे,जिन पिये उन ही प्यास उर आनै।
बार एक पीवै बार-बार पीनौ चाहै,चखे जो यह दूजा कछु ना चाहनै।
ज्योई-ज्योई पीवै त्योई-त्योई प्यास बाढे,अचरज भरी यह रस इस मानै।
"प्यारी" भी प्यास इसी रस की चाहै,विनती जोरी कर जोरि रस पानै।
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