सदा प्रणमऊ हित हरिदास।
रस रीति जोरि उर दीन्ही,कियौ चरणनि कौ दास।
भजन नाम बिनु साधन गुणकै,बल किरपा कियौ खास।
विरथ जात जन्मनि कियै सुथरै,करी अमोलक सबई स्वास।
गुणहीना गुण कहू इन कैसो,नाय शबद मोरैहु पास।
नैन झुकाए"प्यारी"इन करुणा,गावै जैजै हित हरिदास।

Comments

Popular posts from this blog

हरि आए संग

कहा प्राणन

तुव बिन पिया