एक प्रेम पत्र
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------- एक प्रेम पत्र-------
ओ!मोहना सलोने मीत प्रिये,..........
कुछ बात कहनी थी तुमसे,जो हो अवकाश तो आ जाओ।
नही कोई चलो फिर बात नही,लो खत मेरा लेते जाओ।
हो कही अकेले एकांत मे तुम,तब छुप करके चुपचुप पढना।
नही पढना विरह वेदना को,रस प्रेम प्रिय पढते जाओ।
देखो,
जब खिला फूल ये दिखता है,यादो का चमन जल उठता है।
भूली बिसरी उस छुवन से फिर,पुष्प कली को कर जाओ।
उडता ये मेघ का टुकडा जब,झलक तुम्हारी देता है।
उतनी जल्दी उतनी मस्ती,नही प्राणेश्वर! अब दिखलाओ।
तेरी वक्ष छूवन की टीस कभी,चुभती सी धूप मे हो जाती।
इस प्रीत भरी टीस को फिर,रसप्राण! हमे लौटा जाओ।
कहने की यू तो बात नही,तुमसे कब दिल की बात छुपी।
बस बहलाने को दिल अपना,जो सुख पाओ तो आ जाओ।
कुछ बात थी यू बस मिलना था,एक नजर तुम्है बस पीना था।
नही मिल सकते कोई बात नही,संग मुझको ही अपने ले जाओ।
कुछ कहो मौन तो तोडो न,प्रिय प्रेम पत्र का उत्तर दो।
वादा छुपते लफ्जो मे कोई,नवजीवन का करते जाओ।
प्रिय आ जाओ,प्रिय आ जाओ.....
जो सुख पाओ तो आ जाओ.....
======================================= ।। प्यारी जु ।।
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