दौरत देखि कुँज
दौरत देखि कुंज शिशु सी,लाडो तितलिका लाड़ लडावनई।
तप्त कांचना बरण प्यारी कौ,श्याम जामुनी बरण यौ पाई।
ज्यौ ज्यौ उडत ऊपर नीचेई,त्यौ त्यौ प्यारी कर लचकाई।
आगे लली पाछे सब आली,कुंजन हास हाँक रही छाई।
गए टीकौ बेसर कुंडल लटपट,दई चूनर घाघर सब उलझाई।
मौन भयौ प्रति शबद तबहु,जबहु पिय प्यारी तै टकराई।
भरि भुज पिय लिन्ही सम्हारी,चेतन कुंज रस जड़ता छाई।
अटकै नैन छबी अटकी सखियन,"प्यारी" चहै योई अटकै सदाई।
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