अंतिम श्वास आन भई रमणा
अंतिम श्वास आन भई रमणा,तुम बैठ्यै कितहु जाकै।
बिरहा पीर-ना अब सहि जावै,भेट देओ अबहु आकै।
बींद परायै संग काहै भेज्यौ,तुम्हु बींद जई-हो सांचै।
जग करिही उर नाय लगिहै,बैन थारै-ना सहै जातै।
"प्यारी" पुकारी अब पी प्यारौ,आवौ पहलौ जावन साँसै।
Comments
Post a Comment