थिरकत पद पिय प्यारी अद्भुत

थिरकत पद पिय प्यारी अद्भुत।
फबै जावक लाली महावर तै,कनक नुपुर पायल सोई जुत।
ताल उठै गिरै एकही जैसे,अंगुरि बल ठाडै एकही रूख।
रंग रास रस करै रसीलै,"प्यारी" दरश करि अनुपम सुख।

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