रमण !

रमण ! प्यारी दासी तिहारी जी।
तौरो जौरो खैलो मरोरो,रहेगी सदा थारी बलिहारी जी।
फैको देखो संगेई राखौ,लागै सब अदा मनहारी जी।
दरसावौ तरसावौ चाहै ललचावौ,रहू परी देहरी तुम्हारी जी।
जानन मानन प्राणन तुम्ही,भाँति सब चेरी "प्यारी" जी।

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