रे मनवा काहे मोल लियो

रे मनवा! काहै मोल लियौ बैरागा।
काय सुनि नाय सीख इक जग की,काहै रे तू उल्टौ जग सौ भागा।
लीक बनी जग हट काय चलिहै,हंसा तजि काय लगायो उर कागा।
जाकौ परवाह नाय वाकौ उर धर लई,वासौ जोरि सबसौ तुराय काय तागा।
पाछे पछताय रोय होय कहा "प्यारी",पलटिहै ना हटिहै श्याम रंग लागा।

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