पिय बिनु

पिय बिनु

पिय बिनु रहत उदासी जी।
बनहु घरसु रहत एकु, भावै नाहि हासि जी।
सूख्यै नैन बिरह अधीरै,बहवै बिनु पाणी जी।
बाँवरी कहै बैद्य दिखावै,हिय बीती का बतावू जी।
बोली सुनिहै जगत हासू,कहावू कुल नासी जी।
तजू नाय संग साथ थारौ,जावू संग जहा राखी जी।
दूरि दूरि खबर राखौ,कदै आवौ नेक झौरे दासी जी।
बिनती करि करि थाकी हौ गिरधर,काहै रखिहौ हौ प्यासी जी।

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