अब ध्यान जोग कहा चित्त
अब ध्यान जोग कहा चित्त लागै।
दैख्यी जब सौ छब श्याम सलौनी,तब सौ फिरत दृग आगैई आगै।
उन कबहु नैननि अरू कबहु मुस्कनि,कहु टिकै नाय गात फिरै भागेई भागै।
चहै सुनिवै कौ बतियावै को री उन,पल दीखै नाय तऊ कहु लगिहै ना लागै।
"प्यारी" जोग कोऊ देओ ऐसौ बताय,उन बंधि जाए प्रीत सांचेई तागै।
Comments
Post a Comment