अहौ रमण पिय,दृगन तारै ह्यौ ,
अहौ रमण पिय,दृगन तारै ह्यौ , कितहु जा छुपै,नयन म्हारै सौ।
कहि कलहु आवनी,आए नाही च्यौ , पथराए द्वौ नयन,तकत बाट तौ।
बात पहलौई,फिरै संग संग ह्यौ , अबहु का भया,सुनत नाहि ज्यौ।
तुम्हु ना सुनत,पीर बिरहा जौ , तबहु कौ सुनै,कहू काहै ओर सौ।
छूईकै अंग कर,करि अपनी ह्यौ , करिकै निज सखी,जगत छाडि च्यौ।
मौन तौडिकै,कछु तौ कहौ , "प्यारी" तरस गई,दरस प्यारै दौ।
Comments
Post a Comment